दशम महाविद्या साधना
तांत्रिक महालक्ष्मी, गजलक्ष्मी स्वरूप, राजयोग प्रदाता एवं भौतिक व आध्यात्मिक पूर्णता की अधिष्ठात्री महाशक्ति।
आचार्य जी से परामर्श लेंकान्त्या काञ्चनसन्निभां हिमगिरिप्रख्यैश्चतुर्भिर्गजैः, हस्ताग्रस्थितरत्नकुम्भसलिलैरासिच्यमानां मुदा। बिभ्राणां वरमब्जयुग्ममभयं हस्तैः किरीटोज्ज्वलां, क्षौमाबद्धनितम्बबिम्बविलसत्कान्तां भजे पद्मिनीम्॥ — सौभाग्यलक्ष्मी उपनिषद् एवं शारदातिलकम्
दश महाविद्याओं की दिव्य शृंखला में दशम एवं पूर्णता के शिखर पर विराजमान भगवती माँ कमला (कमलात्मिका) को साक्षात तांत्रिक महालक्ष्मी कहा गया है। महाविद्याओं का यह चक्र प्रथम महाविद्या माँ काली (जो काल, संहार और अहंकार के विसर्जन का प्रतीक हैं) से प्रारंभ होकर दशम महाविद्या माँ कमला (जो सृष्टि के परम सौंदर्य, दिव्य ऐश्वर्य, अखंड आनंद और चेतना के पूर्ण प्रकटीकरण का प्रतीक हैं) पर संपन्न होता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार, माँ कमला की साधना साधक को केवल सांसारिक धन ही नहीं देती, बल्कि 'भोग और मोक्ष' दोनों का ऐसा दुर्लभ संगम कराती है कि साधक संसार में रहते हुए भी कमल पुष्प की भांति निर्लिप्त और राजराजेश्वर बन जाता है।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, माँ कमला का प्रत्यक्ष संबंध वैभव, सौंदर्य, कला, काम-सुख और धन के अधिष्ठाता शुक्र ग्रह (Venus) से है और सह-संबंध अमृतमय चंद्र ग्रह (Moon) से है। जब जातक की जन्मकुंडली में शुक्र नीच का होकर दरिद्रता दे रहा हो, शुक्र-केतु की युति से दांपत्य जीवन बिखर रहा हो, अथवा व्यापार में लगातार धन हानि और कर्जों का अंबार लग गया हो, तब माँ कमला का कनकधारा अनुष्ठान जातक के जीवन को सुवर्णमय बना देता है।
कमला तन्त्र, विष्णु पुराण, श्रीमद्देवीभागवत और सौभाग्यलक्ष्मी उपनिषद् में माँ कमला के दिव्य विग्रह का जो अलौकिक वर्णन किया गया है, वह चित्त को आनंदित करने वाला है। भगवती का वर्ण शुद्ध तपे हुए सुवर्ण के समान अत्यंत तेजोमय और कांतिमान है। वे एक विशाल खिले हुए सहस्रदल रक्त-कमल पर पद्मासन में विराजमान हैं। उनके चारों ओर चार विशाल हिमगिरि के समान श्वेत दिव्य ऐरावत हाथी अपनी सूंड में सुवर्ण कुंभ लेकर उन पर निरंतर पवित्र अमृत जल और रत्नों की वर्षा कर रहे हैं—यह स्वरूप साक्षात 'गजलक्ष्मी' कहलाता है। देवी के चार दिव्य हस्त हैं—दो करकमलों में वे सुंदर खिले हुए रक्त-कमल धारण करती हैं, तीसरा हाथ साधक को समस्त भयों से मुक्त करने वाली अभय मुद्रा में है और चौथा हाथ धन-धान्य की वर्षा करने वाली वरद मुद्रा में है जिससे निरंतर सुवर्ण मुद्राओं की धारा प्रवाहित हो रही है।
कमल और हाथियों का आध्यात्मिक रहस्य: कमल का पुष्प कीचड़ में उत्पन्न होकर भी जल और कीचड़ की एक बूंद से भी अछूता रहता है। माँ कमला साधक को यह शिक्षा देती हैं कि इस सांसारिक माया और धन-दौलत के मध्य रहकर भी साधक का मन ब्रह्म में लीन रहना चाहिए। चार हाथी चारों वेदों (ऋक्, यजुः, साम, अथर्व) तथा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष रूपी चार पुरुषार्थों के प्रतीक हैं जो निरंतर भगवती की सेवा में समर्पित रहते हैं।
पौराणिक प्राकट्य की कथा: श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्ति हेतु मंदराचल पर्वत को मथानी और वासुकि नाग को नेती बनाकर क्षीरसागर का मंथन किया, तो उस मंथन से चौदह दिव्य रत्न निकले। उन चौदह रत्नों में सबसे परम पावन, दिव्य और संपूर्ण त्रिलोकी को मुग्ध कर देने वाला रत्न साक्षात भगवती कमला (महालक्ष्मी) के रूप में प्रकट हुआ। जैसे ही देवी समुद्र से प्रकट हुईं, गंधर्वों ने दिव्य गान आरंभ किया, अप्सराएं नृत्य करने लगीं और दिशाओं के दिग्गजों ने स्वर्ण कलशों से उनका अभिषेक किया। समस्त देवताओं, ब्रह्मा, शिव और इंद्र ने देवी की वंदना की। देवी ने स्वयं चलकर जगतपालक भगवान नारायण (विष्णु) के वक्षःस्थल का वरण किया और उनकी नित्य शक्ति बन गईं।
दश महाविद्या परंपरा में माँ कमला को सृष्टि की 'अंतिम सिद्धि' कहा गया है। यह वह अवस्था है जहां साधक अपने समस्त विकारों को जीतकर पूर्ण तृप्ति, परम ऐश्वर्य और ब्रह्म-साक्षात्कार को प्राप्त कर लेता है।
वैदिक ज्योतिष में सुख-सुविधा, वाहन, आभूषण, विलासिता, दांपत्य प्रेम और ऐश्वर्य का कारक ग्रह शुक्र (Venus) है। माँ कमला शुक्र ग्रह की अधिष्ठात्री परम महाशक्ति हैं:
माँ कमला की साधना साधक को कभी भी किसी के आगे हाथ फैलाने नहीं देती। इस साधना के प्रमुख फल निम्नलिखित हैं:
माँ कमला का मूल मंत्र संपूर्ण ब्रह्मांड की संपूर्ण संपदाओं का बीज है। इस मंत्र का जप नियमपूर्वक और शुद्ध भाव से करने पर साक्षात कुबेर भी साधक के अनुचर बन जाते हैं:
१. एकाक्षरी मूल बीज मंत्र:
॥ श्रीं ॥ (Shreem)
२. कमला महामंत्र (अखंड लक्ष्मी प्रदाता):
॥ ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः ॥
३. तांत्रिक अष्ट लक्ष्मी सिद्धि मंत्र:
॥ ॐ ह्रीं अष्ट महालक्ष्म्यै नमः स्वाहा ॥
कमला यंत्र को तांत्रिक परंपरा में कनकधारा और श्री चक्र के समान ही परम ऐश्वर्यशाली माना जाता है। इस यंत्र की स्थापना जिस घर, दुकान या कारखाने में होती है, वहां से दरिद्रता सदा के लिए पलायन कर जाती है।
भारतवर्ष में माँ कमला के दर्शन और अनुष्ठान हेतु निम्नलिखित पीठ अत्यंत जाग्रत और विख्यात हैं:
नीलाचल पहाड़ी, कामाख्या धाम (असम)
पता / स्थान: नीलाचल पहाड़ी, कामाख्या धाम, गुवाहाटी, असम 781010।
ऐतिहासिक महत्व: कामाख्या शक्तिपीठ परिसर में दश महाविद्याओं के अलग-अलग स्वतंत्र मंदिर बने हैं। माँ कमला का मंदिर नीलाचल पहाड़ी के एक अत्यंत मनोरम और शांत भाग में स्थित है। यह पूरे भारत में दश महाविद्या रूप में माँ कमला का मुख्य तांत्रिक शक्तिपीठ है। यहाँ देवी एक जल-कुंड और प्रस्तर शिला के रूप में पूजित हैं। यहाँ दीपावली और नवरात्रि में किए गए अनुष्ठान से साधक का संपूर्ण कुल धन-धान्य से परिपूर्ण हो जाता है।
कैसे पहुँचें: गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से लगभग 7 किमी तथा लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई हवाई अड्डे से 20 किमी दूर।
दर्शन समय: प्रातः 6:00 से दोपहर 1:00 तथा दोपहर 2:30 से सायं 6:00 तक। मैप पर देखें
करवीर शक्तिपीठ, कोल्हापुर (महाराष्ट्र)
पता / स्थान: महाद्वार रोड, कोल्हापुर, महाराष्ट्र 416012।
ऐतिहासिक महत्व: इसे 'करवीर निवासिनी अंबाबाई' का पीठ भी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार यह उन 108 शक्तिपीठों में से एक है जहां सती के नेत्र गिरे थे। यहाँ माँ महालक्ष्मी का चतुर्भुज विग्रह साक्षात कमला स्वरूप में प्रतिष्ठित है। वर्ष में दो बार 'किरणोत्सव' होता है जब सूर्य की किरणें सीधे माँ की प्रतिमा के चरणों से मुख तक जाती हैं। यहाँ दर्शन करने से घोर से घोर दरिद्रता का नाश हो जाता है।
कैसे पहुँचें: कोल्हापुर रेलवे स्टेशन से 2 किमी, पुणे हवाई अड्डे से लगभग 240 किमी दूर।
दर्शन समय: प्रातः 5:00 से रात्रि 10:30 तक। मैप पर देखें
अलमेलु मंगपुरम, तिरुचनूर, तिरुपति
पता / स्थान: अलमेलु मंगपुरम, तिरुचनूर, तिरुपति, आंध्र प्रदेश 517503।
ऐतिहासिक महत्व: पौराणिक मान्यता है कि भगवान वेंकटेश्वर (बालाजी) के दर्शन तब तक पूर्ण नहीं माने जाते जब तक साधक माँ पद्मावती (कमलात्मिका) के दर्शन नहीं कर लेता। माँ पद्मावती एक स्वर्ण सरोवर (पद्मसरोवर) में खिले हुए कमल से प्रकट हुई थीं। यहाँ माँ कमला के दर्शन से साधक को अखंड धन, पारिवारिक शांति और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
कैसे पहुँचें: तिरुपति रेलवे स्टेशन से लगभग 5 किमी और रेणिगुंटा हवाई अड्डे से 15 किमी।
दर्शन समय: प्रातः 5:00 से रात्रि 9:00 तक। मैप पर देखें
माँ कमला यद्यपि अत्यंत सौम्य और वरदायिनी देवी हैं, परंतु लक्ष्मी का स्वभाव चंचल होता है। यदि साधक नियमों का उल्लंघन करता है, तो लक्ष्मी विमुख भी हो जाती हैं। अतः निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखें:
28+ वर्षों का गहन वैदिक ज्योतिष एवं तांत्रिक महाविद्या साधना अनुभव। AIFAS एवं AICAS स्वर्ण पदक विजेता (Gold Medalist)। माँ कमला साधना, कनकधारा अनुष्ठान, व्यापार वृद्धि, अखंड लक्ष्मी प्राप्ति, शुक्र ग्रह शांति एवं राजयोग जाग्रति के विशिष्ट विशेषज्ञ। तोडल तंत्र एवं श्रीविद्यार्णव तंत्र के प्रामाणिक ज्ञाता। अयोध्या धाम से देश-विदेश के हजारों साधकों और व्यापारियों का सफल मार्गदर्शन।
पंडित जी के बारे में अधिक जानेंउत्तर: हाँ, माँ कमला की साधना गृहस्थ साधकों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त और फलदायी मानी गई है। दश महाविद्याओं में माँ कमला और माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी गृहस्थों के समस्त सांसारिक सुखों, संतान, धन और वैभव को पूर्ण करने वाली मानी गई हैं।
उत्तर: कमलगट्टा (कमल के बीज) माँ महालक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है। शास्त्रों के अनुसार कमलगट्टे की माला से किया गया एक मंत्र जप सामान्य माला के सौ मंत्रों के बराबर फल प्रदान करता है। इससे धन का स्थायी वास होता है।
उत्तर: निश्चित रूप से। कुंडली में यदि शुक्र नीच का हो, अस्त हो या पापी ग्रहों से घिरा हो, तो माँ कमला की साधना से शुक्र का अशुभ प्रभाव नष्ट हो जाता है और जातक को आकर्षक व्यक्तित्व, भौतिक सुख, वाहन और वैवाहिक आनंद की प्राप्ति होती है।
उत्तर: अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान, दुकान या ऑफिस की तिजोरी में विधिवत प्राण-प्रतिष्ठित 'कमला यंत्र' अथवा 'कनकधारा यंत्र' की स्थापना करें और नित्य माँ कमला के महामंत्र का 1 माला जप कर धूप-दीप दिखाएं। इससे व्यापार में घाटा बंद होकर धन वृद्धि प्रारंभ हो जाती है।
उत्तर: हाँ, यदि आप व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने में असमर्थ हैं, तो आचार्य पं० राधेश्याम मिश्र जी द्वारा अयोध्या धाम में आपके नाम, गोत्र और विशिष्ट संकल्प के साथ वैदिक ब्राह्मणों द्वारा अनुष्ठान संपन्न कराया जाता है और सिद्ध यंत्र व प्रसाद डाक द्वारा आपके पते पर भेजा जाता है।
धन-धान्य, व्यापार वृद्धि, शुक्र शांति एवं राजयोग प्राप्ति हेतु आज ही पूज्य आचार्य जी से व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त करें।