"देने वाला हाथ लेने वाले हाथ से हमेशा ऊपर होता है।"
आपका छोटा सा दान किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।
Mahavidya Astro Science (RADHESHYAM MISHRA)
दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे।
देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम्॥
अर्थ: बिना प्रत्युपकार की इच्छा के, उचित स्थान, समय और सुपात्र को दिया गया दान सात्विक है।
— श्रीमद्भगवद्गीता 17.20
परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः।
परोपकाराय दुहन्ति गावः परोपकारार्थमिदं शरीरम्॥
अर्थ: वृक्ष फल, नदियाँ जल, गायें दूध दूसरों के लिए देती हैं — यह शरीर भी परोपकार के लिए है।
— सुभाषित रत्नाकर
अन्नदानं परं दानं विद्यादानमतः परम्।
अन्नेन क्षणिका तृप्तिर्यावज्जीवं च विद्यया॥
अर्थ: अन्न दान श्रेष्ठ है, विद्या दान उससे भी श्रेष्ठ। अन्न से क्षणिक तृप्ति, विद्या से जीवन भर।
— चाणक्य नीति
शास्त्रों में बताए गए श्रेष्ठ दान जो आपके जीवन में पुण्य और समृद्धि लाते हैं
भूखे को भोजन कराना सबसे बड़ा पुण्य है। "अन्नदाता सुखी भव" - जो अन्न देता है वह सदा सुखी रहता है।
गौ माता की सेवा में दान देने से समस्त पापों का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
मंदिर निर्माण, पूजा-पाठ, हवन-यज्ञ में दान देने से देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।
गरीब बच्चों की शिक्षा में सहयोग करने से अक्षय पुण्य मिलता है। विद्या दान सर्वोत्तम है।
रोगियों की सेवा और औषधि दान जीवनदान के समान है। इससे आरोग्य की प्राप्ति होती है।
प्यासे को जल पिलाना अमृत दान के समान है। प्याऊ लगवाना महापुण्य का कार्य है।
ब्राह्मणों को भोजन कराने से पितृ तृप्त होते हैं और वंश में वृद्धि होती है।
गरीब कन्याओं के विवाह में सहयोग देना परम पुण्य का कार्य है।
दान से पुण्य का संचय होता है जो इस जन्म और अगले जन्म दोनों में फल देता है। शास्त्रों में कहा गया है कि दान का फल अक्षय होता है।
ज्योतिष के अनुसार सही पात्र को दान देने से ग्रहों की अशुभता कम होती है और जीवन में सुख-शांति आती है।
आपके दान का फल आपके पितरों को भी मिलता है, जिससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है।
दान देने से मन को असीम शांति और संतोष मिलता है। यह आंतरिक सुख का स्रोत है।
दान करने वालों के नाम से विशेष पूजा में संकल्प लिया जाता है। आपके परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की जाती है।
"जो देता है वो पाता है, जो बांटता है वो बढ़ता है"
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राजा हरिश्चंद्र
सत्य और दान के लिए अपना राज्य, परिवार सब त्याग दिया। उनकी दानशीलता आज भी अमर है।
दानवीर कर्ण
सूर्य पुत्र कर्ण ने याचक को कभी खाली नहीं लौटाया। कवच-कुंडल तक दान कर दिए।
राजा शिबि
एक कबूतर की रक्षा के लिए अपना शरीर का मांस काटकर दे दिया। परम दानवीर!
महर्षि दधीचि
देवताओं की रक्षा के लिए अपनी अस्थियाँ दान कर दीं, जिनसे वज्र बना।
भामाशाह
महाराणा प्रताप को अपनी संपूर्ण संपत्ति दान कर दी। मातृभूमि के लिए त्याग!
राजा बलि
भगवान वामन को तीन पग भूमि में सब कुछ दान कर दिया। दानवीरता की मिसाल!
दान के बाद सूचित करें — आपके नाम से संकल्प लिया जाएगा
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