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त्रिकूट सुंदरी

माँ ललिता अंबा — त्रिपुर सुंदरी। श्री विद्या की अधिष्ठात्री, कलयुग का कल्पवृक्ष।

ललिता सहस्रनाम और सौंदर्य लहरी का नित्य पाठ। भोग और मोक्ष का संगम।

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त्रिकूट सुंदरी वह देवी हैं जो तीन कूटों—वाग्भव, कामराज और शक्ति कूट—की स्वामिनी हैं। श्री विद्या परंपरा में इन्हें 'राजराजेश्वरी' कहा जाता है। तीनों लोकों (जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति) और तीनों कालों में सर्वाधिक सुंदर।

माँ ललिता की साधना कलयुग के लिए कल्पवृक्ष के समान है। जहाँ अन्य महाविद्याएँ उग्र हो सकती हैं और कठिन नियमों की मांग करती हैं, वहीं श्री विद्या की उपासना गृहस्थ साधक को प्रेम, सौंदर्य और ऐश्वर्य के साथ मोक्ष की ओर ले जाती है। ज्योतिषीय संबंध: बुध (Mercury)

तत्त्व और स्वरूप

माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी — चतुर्भुज देवी, रक्त वस्त्र और स्वर्ण आभूषण, अंकुश, धनुष-बाण के साथ यंत्र पृष्ठभूमि में
माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी — श्री विद्या की अधिष्ठात्री

त्रिपुर सुंदरी का अर्थ है—तीनों लोकों और तीनों कालों में सर्वाधिक सुंदर। वे सोलह वर्ष की नित्य युवती हैं, इसलिए इन्हें षोडशी भी कहा जाता है। इनका वर्ण उगते हुए सूर्य के समान रक्तिम है। इनके चार हाथों में—पाश (राग/इच्छा), अंकुश (क्रोध/द्वेष), ईख का धनुष (मन) और पुष्प बाण (पंच तन्मात्राएं)—ये चारों साधक की चित्तवृत्तियों को माँ की ओर मोड़ने का प्रतीक हैं। वे कामेश्वरी हैं; अतः दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य उनकी कृपा से बना रहता है।

किस किस ग्रंथ में इनके स्वरूप का वर्णन मिलता है: माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी के स्वरूप का विस्तृत वर्णन ब्रह्मांड पुराण (ललितोपाख्यान तथा ललिता सहस्रनाम), सौंदर्य लहरी (आदि शंकराचार्य रचित), तथा तंत्र ग्रंथों जैसे तंत्रराज तंत्र, श्रीविद्यार्णव तंत्र और ललिता सहस्रनाम (ब्रह्मांड पुराण के उत्तर खंड) में मिलता है। इन ग्रंथों में देवी की चतुर्भुज मूर्ति, वस्त्र-आभूषण, धनुष-बाण, अंकुश-पाश और यंत्र-मंडल का स्पष्ट विवरण दिया गया है।

तीन रूपों में उपासना

श्री विद्या में माँ ललिता की उपासना तीन रूपों में की जाती है—स्थूल, सूक्ष्म और परा। साधक गुरु निर्देशानुसार इनमें से एक या अधिक रूपों का अभ्यास करता है।

अन्य नाम और मंत्र परिचय

माँ ललिता को षोडशी (सोलह वर्ष की नित्य युवती, सोलह कामनाओं की स्वामिनी), कामेश्वरी (कामदेव की अधिष्ठात्री), राजराजेश्वरी (राजाओं की राज्ञी), कामाक्षी और महादेवी के नाम से भी जाना जाता है। दश महाविद्याओं में इनका तीसरा स्थान है।

श्री विद्या मंत्र तीन कूटों—वाग्भव, कामराज और शक्ति कूट—में विभक्त है। पंचदशाक्षरी (१५ अक्षर) मंत्र श्री विद्या का मूल रहस्य माना जाता है; षोडशी (१६ अक्षर) में एक अक्षर और जुड़ता है। मंत्र की दीक्षा और विधि गुरु से ही लेनी चाहिए।

श्री चक्र और शुभ समय

श्री चक्र में नौ चक्र होते हैं—त्रिपुरा सुन्दरी केंद्र बिंदु (बिंदु) में विराजमान हैं; बाहर की ओर त्रिकोण, अष्टदल कमल, चतुर्दशार, बाह्य दशार, दशार, अष्टार, त्रिकोण और भूवरेष्ठ (चार द्वार)। पूर्णिमा, प्रदोष और शुक्ल पक्ष की षष्ठी (ललिता षष्ठी) माँ की उपासना के लिए विशेष शुभ माने गए हैं। चैत्र और फाल्गुन मास में श्री विद्या अनुष्ठान का विशेष महत्व है।

माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी के प्रसिद्ध मंदिर

माँ त्रिपुर सुंदरी (देवी त्रिपुरेश्वरी, षोडशी, कामाक्षी) के दर्शन और श्री विद्या साधना के लिए भारत में कई प्राचीन एवं प्रसिद्ध मंदिर हैं। नीचे शोध आधारित पूर्ण स्थल जानकारी दी गई है।

यात्रा से पहले ध्यान दें: पारंपरिक या सादा पोशाक पहनें (शॉर्ट्स, स्लीवलेस टॉप से बचें)। जूते/चप्पल मंदिर के बाहर उतारें। दर्शन समय और नियम की अद्यतन जानकारी यात्रा से पहले अवश्य ले लें।

माताबाड़ी (त्रिपुरा सुंदरी) मंदिर, उदयपुर, त्रिपुरा

माताबाड़ी त्रिपुरा सुंदरी मंदिर, उदयपुर, त्रिपुरा — ५१ शक्तिपीठों में एक माताबाड़ी मंदिर, उदयपुर (त्रिपुरा)

पता / स्थान: उदयपुर, गोमती जिला, त्रिपुरा 799013। प्राचीन उदयपुर शहर में एक छोटी पहाड़ी (कूर्म पीठ—कछुआ आकार) पर स्थित।

दूरी: अगरतला से लगभग ५५ किमी (सड़क)। रेल व सड़क मार्ग से जुड़ा।

कैसे पहुँचें: अगरतला से बस/टैक्सी; निकटतम रेलहेड अगरतला। हवाई: अगरतला एयरपोर्ट।

दर्शन समय: गर्मी—सुबह ६:०० से १:००, दोपहर २:३० से ९:००। सर्दी—सुबह ७:०० से १:००, दोपहर २:३० से ८:३०। आरती लगभग सुबह ६:३० और शाम ६:३०।

विशेष दिन / त्यौहार: ललिता षष्ठी, पूर्णिमा, शुक्रवार। दीपावली पर वार्षिक मेला (दो लाख से अधिक श्रद्धालु)। यात्रा का सर्वोत्तम समय—अक्टूबर से मार्च।

विशेष: ५१ शक्तिपीठों में एक (माँ सती के दाएँ पैर का अंगूठा)। महाराजा धन्य माणिक्य द्वारा १५०१ ई. में बंगाली एक-रत्न शैली में निर्मित। मुख्य मूर्ति लगभग ५ फुट (कस्ती पत्थर), "छोटो-माँ" (२ फुट) भी विराजमान। पूर्वोत्तर में कामाख्या के बाद सर्वाधिक भक्त।

वेबसाइट / मैप: आधिकारिक वेबसाइट · मैप पर देखें

ललिता महा त्रिपुर सुंदरी मंदिर, हरिद्वार, उत्तराखंड

ललिता महा त्रिपुर सुंदरी मंदिर, हरिद्वार — दृश्य १ ललिता महा त्रिपुर सुंदरी मंदिर, हरिद्वार — दृश्य २ ललिता महा त्रिपुर सुंदरी मंदिर, हरिद्वार — दृश्य ३ ललिता महा त्रिपुर सुंदरी मंदिर, हरिद्वार — दृश्य ४
ललिता महा मंदिर, हरिद्वार

पता / स्थान: हरिद्वार, उत्तराखंड। एक आश्रम परिसर के अंदर स्थित। (नया मंदिर—प्राण प्रतिष्ठा मई २०२३, गंगा दशहरा।)

दूरी: देहरादून हवाई अड्डा (जॉली ग्रांट) से लगभग ४० किमी। हरिद्वार शहर के अंदर।

कैसे पहुँचें: रेल—हरिद्वार जंक्शन (दिल्ली, देहरादून, ऋषिकेश आदि से सीधी ट्रेन)। हवाई—जॉली ग्रांट एयरपोर्ट, देहरादून। सड़क—दिल्ली, ऋषिकेश, देहरादून से बस/कार।

दर्शन समय: आश्रम/मंदिर के अनुसार; यात्रा से पहले संबंधित आश्रम से पुष्टि कर लें।

विशेष दिन / त्यौहार: ललिता षष्ठी, पूर्णिमा, शुक्रवार। गंगा दशहरा (प्राण प्रतिष्ठा मई २०२३)।

विशेष: श्री विद्या परंपरा में दर्शन और पूजन के लिए जाना जाता है। माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी (राजराजेश्वरी, षोडशी, कामाक्षी) की उपासना। अधिक जानकारी आश्रम/वेबसाइट से ले सकते हैं। मैप पर देखें

त्रिपुर सुंदरी मंदिर, नगर, हिमाचल प्रदेश

त्रिपुर सुंदरी मंदिर, नगर, हिमाचल प्रदेश त्रिपुर सुंदरी मंदिर, नगर (हि.प्र.)

पता / स्थान: स्कूल रोड / नगर कैसल रोड, नगर गाँव, नगर 175130, हिमाचल प्रदेश। नगर कैसल से लगभग ४००–५०० मीटर पूर्व, नदी/धारा के किनारे।

दूरी: मनाली बस स्टैंड से २१ किमी। कुल्लू बस स्टैंड से २३ किमी। नगर बस स्टैंड से लगभग १ किमी।

कैसे पहुँचें: मनाली या कुल्लू से कैब/टैक्सी। नगर कैसल से पैदल पथ। कुल्लू–मनाली मार्ग पर नगर में उतरकर स्थानीय वाहन या पैदल।

दर्शन समय: स्थानीय मंदिर समय के अनुसार; सुबह से शाम तक दर्शन। यात्रा से पहले पुष्टि कर लें।

विशेष दिन / त्यौहार: ललिता षष्ठी, पूर्णिमा, शुक्रवार। वार्षिक मेला—शारी यात्रा (मई)।

विशेष: पगोडा शैली का लकड़ी (देवदार) का तीन मंजिला मंदिर, शंक्वाकार शिखर। स्थानीय भू-देवी/मातृ शक्ति के रूप में माँ त्रिपुर सुंदरी की पूजा। नगर के सबसे सुंदर मंदिरों में एक। आसपास नगर कैसल, रोएरिच आर्ट गैलरी। मैप पर देखें

श्री बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर, तिरुवनंतपुरम, केरल

श्री बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर, तिरुवनंतपुरम, केरल बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर, तिरुवनंतपुरम

पता / स्थान: चावड़ीनाडा, वेंगनूर, तिरुवनंतपुरम, केरल। कोवलम से लगभग ५ किमी।

कैसे पहुँचें: तिरुवनंतपुरम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन से सड़क मार्ग। कोवलम/वेंगनूर से स्थानीय वाहन।

दर्शन समय: मुख्यतः पूर्णिमा और विशेष अवसरों पर खुला; स्थानीय समय की पुष्टि कर लें।

विशेष दिन / त्यौहार: ललिता षष्ठी, पूर्णिमा, शुक्रवार। पूर्णिमा पर विशेष दर्शन।

विशेष: श्री बाला त्रिपुर सुंदरी देवी (पदकालीयम्मा)। प्राचीन आय राजवंश से जुड़ाव; २००९ में पुनर्जीवित। ५१ अक्षर देवताओं की पूजा। विश्व का सबसे बड़ा पंजलोह (पंचधातु) मूर्ति—पूर्णिमिकावु देवी ६.५ फुट, १३०० किग्रा। आसपास कोवलम बीच। मैप पर देखें

अन्य मंदिर (श्री विद्या / त्रिपुर सुंदरी से जुड़े स्थल)

भारत के अन्य राज्यों में भी माँ त्रिपुर सुंदरी और श्री विद्या परंपरा से जुड़े मंदिर एवं पीठ हैं। यात्रा से पहले दर्शन समय और नियम की अद्यतन जानकारी अवश्य ले लें।

बसरा (निर्मल), तेलंगाना

श्री विद्या / त्रिपुर सुंदरी मंदिर, बसरा, तेलंगाना बसरा (निर्मल), तेलंगाना

दर्शन समय: स्थानीय मंदिर/आश्रम समय के अनुसार; पूर्व में पुष्टि कर लें।

विशेष दिन / त्यौहार: ललिता षष्ठी, पूर्णिमा, शुक्रवार।

बसरा (निर्मल) में श्री विद्या / त्रिपुर सुंदरी से जुड़े मंदिर और आश्रम। मैप पर देखें

आंध्र प्रदेश

श्री विद्या मंदिर, आंध्र प्रदेश आंध्र प्रदेश

दर्शन समय: स्थानीय मंदिर समय के अनुसार; पूर्व में पुष्टि कर लें।

विशेष दिन / त्यौहार: ललिता षष्ठी, पूर्णिमा, शुक्रवार।

कई शक्तिपीठ और श्री विद्या उपासना केंद्र। मैप पर देखें

कामाक्षी अम्मन, कांचीपुरम, तमिलनाडु

कामाक्षी अम्मन मंदिर, कांचीपुरम, तमिलनाडु कांचीपुरम, तमिलनाडु

दर्शन समय: कामाक्षी मंदिर सुबह से शाम तक; स्थानीय समय की पुष्टि कर लें।

विशेष दिन / त्यौहार: ललिता षष्ठी, पूर्णिमा, शुक्रवार। नवरात्रि में विशेष।

कामाक्षी अम्मन मंदिर (कांचीपुरम) तथा अन्य शक्ति स्थल श्री विद्या परंपरा से संबंधित। मैप पर देखें

श्रृंगेरी आदि, कर्नाटक

श्री विद्या उपासना, कर्नाटक कर्नाटक

दर्शन समय: मठ/पीठ के अनुसार; पूर्व में पुष्टि कर लें।

विशेष दिन / त्यौहार: ललिता षष्ठी, पूर्णिमा, शुक्रवार।

श्रृंगेरी और अन्य मठ/पीठों में श्री विद्या उपासना। मैप पर देखें

राजरप्पा चंडी आदि, झारखंड

राजरप्पा चंडी तथा शक्ति स्थल, झारखंड झारखंड

दर्शन समय: स्थानीय मंदिर समय के अनुसार; पूर्व में पुष्टि कर लें।

विशेष दिन / त्यौहार: ललिता षष्ठी, पूर्णिमा, शुक्रवार।

राजरप्पा चंडी तथा अन्य शक्ति स्थल; कुछ में त्रिपुर सुंदरी/षोडशी पूजन। मैप पर देखें

यात्रा से पहले दर्शन समय और नियम की अद्यतन जानकारी अवश्य ले लें।

श्री विद्या सेवा पद्धति — नित्य पूजन विधि

माँ ललिता की सेवा पद्धति अत्यंत व्यवस्थित और राजसी होती है। साधक को नित्य कर्म का पालन करना अनिवार्य होता है। संक्षिप्त विधि नीचे दी गई है; पूर्ण विधि गुरु निर्देशानुसार सीखें।

ललिता सहस्रनाम — फलश्रुति (लाभ)

ब्रह्मांड पुराण के उत्तर खंड में ललिता सहस्रनाम की फलश्रुति में इसके लाभों का स्पष्ट उल्लेख है।

सौंदर्य लहरी — वशीकरण और ऐश्वर्य

आदि शंकराचार्य रचित सौंदर्य लहरी तंत्र और मंत्र का महासागर है। माँ ललिता की कृपा से विशिष्ट कामनाओं की पूर्ति के लिए इसके श्लोकों का प्रयोग किया जाता है।

दैनिक जीवन में लाभ

पंद्रह नित्याएँ: श्री विद्या में चन्द्र कला के अनुसार माँ ललिता की पंद्रह नित्य शक्तियाँ मानी गई हैं—कला १ से १५ तक। इनका पूजन और स्तोत्र (जैसे नित्याक्षरादि) गुरु परंपरा में दिया जाता है। ये नित्याएँ सृष्टि के नित्य चक्र का प्रतीक हैं।

ज्योतिषाचार्य पंडित राधेश्याम मिश्र

ज्योतिषाचार्य पंडित राधेश्याम मिश्र

28+ वर्षों का वैदिक ज्योतिष और तंत्र शास्त्र अनुभव। AIFAS एवं AICAS गोल्ड मेडलिस्ट। श्री विद्या और दश महाविद्या साधना में विशेषज्ञ। तोडल तंत्र, मुण्डमाला तंत्र पर आधारित मार्गदर्शन। अयोध्या से देश-विदेश में ऑनलाइन और ऑन-साइट परामर्श।

पंडित जी के बारे में अधिक जानें

माँ ललिता श्री विद्या और ललिता सहस्रनाम के लिए आचार्य जी से संपर्क करें।

नित्य पूजन विधि, खड्गमाला स्तोत्र और सौंदर्य लहरी के श्लोक—गुरु निर्देशानुसार सीखें।