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विवाह संस्कार

वैदिक विवाह संस्कार: अग्नि को साक्षी मानकर सात वचनों का संकल्प।

सिर्फ इवेंट नहीं—यह संस्कारों का उत्सव है। सप्तपदी, कन्यादान, पाणिग्रहण।

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सप्तपदी के सात फेरे सात प्रतिज्ञाएँ हैं—भोजन-पोषण, शक्ति-स्वास्थ्य, धन-समृद्धि, सुख-दुख में साथ, उत्तम संतान, हर ऋतु में साथ, और मित्रता (सखा भाव)।

कन्यादान कोई 'दान' नहीं—एक पिता द्वारा अपनी सबसे कीमती धरोहर (लक्ष्मी) को विष्णु स्वरूप वर को सौंपना। पाणिग्रहण (हाथ थामना) जीवन भर रक्षा का वचन है। विवाह में शुक्र (प्रेम-रोमांस) और बृहस्पति (पति-ज्ञान) की विशेष शांति और पूजन शामिल है ताकि दांपत्य जीवन में प्रेम और समझ बनी रहे।

विवाह संस्कार के लाभ और लोक मान्यताएं

संस्कार के लाभ

  • दांपत्य सुख: सप्तपदी के सात वचन—भोजन-पोषण, शक्ति-स्वास्थ्य, धन-समृद्धि, सुख-दुख में साथ, उत्तम संतान, हर ऋतु में साथ और मित्रता—जीवन भर बंधन मजबूत करते हैं।
  • ग्रह शांति: विवाह में शुक्र (प्रेम-रोमांस) और बृहस्पति (पति-ज्ञान) की शांति—दांपत्य जीवन में प्रेम और समझ बनी रहने की मान्यता।
  • कन्यादान व पाणिग्रहण: अग्नि को साक्षी मानकर जीवन भर रक्षा और समर्पण का वचन—परिवार में आशीर्वाद का विश्वास।
  • शुभ मुहूर्त: कुंडली आधारित विवाह मुहूर्त से दांपत्य जीवन सुखी और स्थायी रहता है—ऐसी आस्था।

लोक मान्यताएं

  • सप्तपदी के सात फेरे सात प्रतिज्ञाएँ माने जाते हैं—इन्हें पूरी श्रद्धा से करने पर विवाह सुखी रहता है।
  • कन्यादान को पिता द्वारा लक्ष्मी का वर को सौंपना माना जाता है; इससे घर में धन और शांति बनी रहती है।
  • शुभ मुहूर्त में विवाह करने से ग्रह अनुकूल रहते हैं और दांपत्य जीवन में सुख—ऐसी व्यापक आस्था।

विवाह मुहूर्त और संस्कार की व्यवस्था के लिए आचार्य जी से संपर्क करें। सप्तपदी, कन्यादान, पाणिग्रहण—शास्त्रोक्त विधि से संपन्न करवाया जाता है।

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ज्योतिषाचार्य पंडित राधेश्याम मिश्र

ज्योतिषाचार्य पंडित राधेश्याम मिश्र

28+ वर्षों का वैदिक ज्योतिष और संस्कार अनुभव। विवाह संस्कार, सप्तपदी, कन्यादान और विवाह मुहूर्त में विशेषज्ञ। शुक्र-बृहस्पति शांति सम्मिलित।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दोनों की जन्म कुंडली के आधार पर शुभ तिथि और मुहूर्त निकाला जाता है। आचार्य जी कुंडली मिलान के साथ विवाह मुहूर्त बताते हैं।

पूर्ण विवाह संस्कार (कन्यादान, पाणिग्रहण, सप्तपदी, हवन आदि) या आपकी जरूरत के अनुसार अलग-अलग संस्कार करवाए जा सकते हैं। आचार्य जी से बात करें।

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