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श्री सत्यनारायण व्रत पूजन

श्री सत्यनारायण व्रत पूजन: घर में सुख, शांति और अखंड समृद्धि का वैदिक अनुष्ठान।

स्कंद पुराण वर्णित विधि से, काशी और हरिद्वार के विद्वान आचार्यों द्वारा संपन्न।

सत्यव्रतं सत्यपरं त्रिसत्यं सत्यस्य योनिं निहितं च सत्ये। सत्यस्य सत्यं ऋतसत्यनेत्रं सत्यात्मकं त्वां शरणं प्रपन्नाः।।

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श्री सत्यनारायण कथा: भगवान विष्णु और भक्तगण पूजन
सत्यनारायण का अर्थ है—सत्य ही नारायण है। यह पूजा कलयुग में सबसे सरल और फलदायी मानी गई है।

अक्सर लोग इसे केवल 'कथा' मानते हैं। यह एक 'व्रत' है। संकल्प लेकर की गई यह पूजा पारिवारिक कलह से मुक्ति देती है, मनोकामना पूर्ति करती है और ज्योतिष के अनुसार कुंडली में कमजोर बृहस्पति को मजबूत करती है—शिक्षा, धन और संतान सुख में वृद्धि होती है।

पूजा के लाभ और लोक मान्यताएं

पूजा के लाभ

  • पारिवारिक कलह से मुक्ति: घर का वातावरण सकारात्मक बनता है, तनाव कम होता है।
  • मनोकामना पूर्ति: नौकरी, विवाह या संतान प्राप्ति जैसे संकल्पों को पूरा करने में सहायक मानी जाती है।
  • ग्रह शांति (बृहस्पति): ज्योतिष के अनुसार भगवान विष्णु बृहस्पति के अधिपति हैं—पूजा से कुंडली में बृहस्पति मजबूत होने से शिक्षा, धन और संतान सुख में वृद्धि की मान्यता है।
  • सुख-समृद्धि: घर में अन्न-धन की कमी दूर होने और निरंतर शांति बनी रहने का विश्वास।

लोक मान्यताएं

  • पूर्णिमा और संक्रांति पर सत्यनारायण व्रत करने से विशेष फल मिलता है—ऐसी आस्था व्यापक है।
  • कथा बिना भोग (प्रसाद) अधूरी मानी जाती है; प्रसाद बाँटने से पुण्य और घर में लक्ष्मी का वास बना रहता है।
  • संकल्प लेकर नियम से पूजा करने वालों के घर में सत्यनारायण की कृपा सदैव रहती है—ऐसी लोकधारणा है।

विधि की जानकारी और शुभ मुहूर्त के लिए आचार्य जी से संपर्क करें। पूजा पूरी सामग्री के साथ घर पर करवाई जाती है।

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आचार्य पूरी सामग्री के साथ घर आकर पूजा करवाते हैं।

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ज्योतिषाचार्य पंडित राधेश्याम मिश्र

28+ वर्षों का वैदिक ज्योतिष और पूजा-अनुष्ठान अनुभव। शास्त्रोक्त विधि से सत्यनारायण कथा व सभी पूजा करवाते हैं। गृह सेवा उपलब्ध।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्णिमा और संक्रांति पर विशेष रूप से की जाती है; अन्य शुभ तिथियों पर भी करवा सकते हैं। आचार्य जी आपकी कुंडली के अनुसार शुभ मुहूर्त बताते हैं।

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