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कालसर्प दोष शांति पूजा

कालसर्प दोष निवारण के लिए विधिवत शांति पूजा।

राहु-केतु के बीच सभी ग्रह होने पर कालसर्प दोष बनता है। विशेष पूजा से शांति मिलती है।

ॐ नमः शिवाय। सर्पराजाय विद्महे, शिवलिंगाय धीमहि, तन्नो नागः प्रचोदयात्।

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जब कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाएं तो कालसर्प दोष बनता है। इससे जीवन में विलंब, अड़चनें और मानसिक तनाव होता है।

कालसर्प दोष 12 प्रकार का होता है - अनंत, कुलिक, वासुकि, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखनाद, घातक, विषधर और शेषनाग। राहु-केतु शांति और पूजा सेवाएँ भी देखें। त्र्यंबकेश्वर में विशेष रूप से यह पूजा की जाती है।

कालसर्प दोष शांति पूजा के लाभ

  • मानसिक शांति: चिंता, तनाव और नकारात्मक विचारों से मुक्ति
  • विलंब से राहत: कार्यों में आने वाली अड़चनें दूर होती हैं
  • आर्थिक स्थिरता: धन संबंधी समस्याओं में कमी
  • वैवाहिक सुख: विवाह में देरी या वैवाहिक कलह से राहत
  • संतान सुख: संतान प्राप्ति में बाधाएं दूर होती हैं
  • करियर में उन्नति: नौकरी और व्यापार में सफलता

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कालसर्प दोष के 12 प्रकार

ज्योतिषाचार्य पंडित राधेश्याम मिश्र

28+ वर्षों का वैदिक ज्योतिष और पूजा-अनुष्ठान अनुभव। शास्त्रोक्त विधि से कालसर्प दोष शांति पूजा।

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